श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 327
 
 
श्लोक  2.23.327 
প্রাণী-মাত্র কারে যদি করে অধিকার
মোর দোষ নাহি তবে করিব সṁহার
प्राणी-मात्र कारे यदि करे अधिकार
मोर दोष नाहि तबे करिब सꣳहार
 
 
अनुवाद
“अतः यदि यम किसी भी जीवित प्राणी को दंडित करके अपना अधिकार प्रदर्शित करने का प्रयास करता है, तो उसे नष्ट करने पर मुझे दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
 
“So if Yama tries to demonstrate his authority by punishing any living being, I cannot be held guilty for destroying him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)