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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 316
श्लोक
2.23.316
কেহ বলে,—“মুঞি এই নিমাই পণ্ডিত
জগত উদ্ধার লাগিঽ হৈনু বিদিত”
केह बले,—“मुञि एइ निमाइ पण्डित
जगत उद्धार लागिऽ हैनु विदित”
अनुवाद
किसी ने कहा, "मैं निमाई पंडित हूँ। मैं संसार का उद्धार करने के लिए अवतरित हुआ हूँ।"
Someone said, "I am Nimai Pandit. I have appeared to save the world."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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