श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 315
 
 
श्लोक  2.23.315 
কেহ দণ্ডবত্ হয কাহারো চরণে
কেহ কোলাকুলি বা করযে কাঽরো সনে
केह दण्डवत् हय काहारो चरणे
केह कोलाकुलि वा करये काऽरो सने
 
 
अनुवाद
कुछ लोगों ने दूसरों के चरणों में प्रणाम किया, तो कुछ ने दूसरों को गले लगाया।
 
Some people bowed at the feet of others, while some hugged others.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)