श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 300
 
 
श्लोक  2.23.300 
ঽবারকোণা-ঘটেঽ, ঽনগরিযা-ঘাটেঽ গিযা
ঽগঙ্গার নগরঽ দিযা গেলা ঽসিমুলিযাঽ
ऽबारकोणा-घटेऽ, ऽनगरिया-घाटेऽ गिया
ऽगङ्गार नगरऽ दिया गेला ऽसिमुलियाऽ
 
 
अनुवाद
बारकोणाघाट और नागरियाघाट से होते हुए वे गंगानगर से सिमुलिया पहुँचे।
 
They reached Simulia from Ganganagar via Barkonaghat and Nagariyaghat.
तात्पर्य
माधाई के घाट के बाद बारहकोणा-घाट स्थित था। उसके बाद शहर के वासियों के लिये एक विशाल घाट था। उसके बाद गंगानगर नाम का गाँव था। कुछ समय पहले गंगानगर, भारीडाँगा गाँव के पास स्थित था। गंगानगर के उत्तर-पूर्व कोने से एक मील से भी कम दूरी पर सिमुलिया का प्राचीन गाँव स्थित था। चूँकि गंगा नदी वर्तमान में 'छाड़ी गंगा' नदी तट के अन्दर बहती है, जिसे 'गुडगुडे' भी कहा जाता है, इस कारण सिमुलिया गाँव के कुछ भाग बह गये और उस बही हुई जगह को कभी कृष्णानगर, कभी चक्राष्टशाली, कभी तारणवास और कभी कड़ियाटी कहा जाता था। वर्तमान में खालसेपाड़ा नामक स्थान पर पीपल के पेड़ के नीचे देवी सिमंतनी विराजमान हैं। प्रभु के समय में सिमुलिया गाँव कुछ हजार हाथ इसी स्थान से हटा हुआ था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)