श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.23.3 
হেন-মতে নবদ্বীপে প্রভু বিশ্বম্ভর
ক্রীডা করে, নহে সর্ব-নযন-গোচর
हेन-मते नवद्वीपे प्रभु विश्वम्भर
क्रीडा करे, नहे सर्व-नयन-गोचर
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान विश्वम्भर ने नवद्वीप में ऐसी लीलाएं कीं जिन्हें हर कोई नहीं देख सकता था।
 
In this way Lord Visvambhara performed such pastimes in Navadvipa which not everyone could see.
तात्पर्य
भगवान विस्वंभर के सभी लीलाओं को देखने के पात्र कोई नहीं है. कोई भी व्यक्ति वही लीला देख पाने में समर्थ है जिसके देखने के लिए वह योग्य हो. श्रीमद् भागवत (10.43.17) में कहा गया है:

मल्लानां अशनिर नृणां नर-वरः स्त्रीणां स्मरो मूर्तिमान्

गोपानां स्व-जनोऽसतां क्षिति-भुजां शास्रा स्व-पित्रोः शिशुः

मृत्युर् भोज-पतेर् विराड् अविदुषां तत्वं परं योगिनां

वृष्णीनां पर-देवतेति विदितो रङ्गं गतः साग्रजः

“जब भगवान कृष्ण मैदान में अपने बड़े भाई के साथ प्रवेश किये तो वहां विभिन्न प्रकार के लोगों ने कृष्ण को विभिन्न प्रकार से माना. पहलवानों ने कृष्ण को वज्र माना, मथुरा के लोगों ने पुरुषों में श्रेष्ठ माना, महिलाओं ने कामदेव साक्षात् माना, गोपों ने अपने रिश्तेदार माना, अधर्मी राजाओं ने दंड देने वाले माना, उनके माता-पिता ने अपना बालक माना, भोजों के राजा ने यमराज माना, बुद्धिहीन लोगों ने भगवान के विराट रूप को माना, योगियों ने परम सत्य को माना और वृष्णियों ने अपने सर्वाधिक पूजनीय देवता को माना.”

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)