श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 295
 
 
श्लोक  2.23.295 
অবিচ্ছিন্ন হরি-ধ্বনি সর্ব-লোকে করে
ব্রহ্মাণ্ড ভেদিযা ধ্বনি যায বৈকুন্ঠেরে
अविच्छिन्न हरि-ध्वनि सर्व-लोके करे
ब्रह्माण्ड भेदिया ध्वनि याय वैकुन्ठेरे
 
 
अनुवाद
सभी द्वारा हरि के नामों के जाप की अविच्छिन्न ध्वनि ब्रह्माण्ड में फैल गई और वैकुण्ठ में प्रवेश कर गई।
 
The uninterrupted sound of everyone chanting Hari's names spread throughout the universe and entered Vaikuntha.
तात्पर्य
सांसारिक जीवों के कानों में प्रवेश करने वाले शब्द चौदह लोकों के क्षेत्र से संबंधित होते हैं। आध्यात्मिक ध्वनि कंपन चौदह भौतिक लोकों, विराज और ब्रह्मलोक में प्रवेश करते हैं, और ब्रह्मांड के कानों में प्रवेश करने के बाद, एकायन-पद्धति, या पंचरात्रों में निषिद्ध प्रक्रिया के रूप में प्रकट होते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)