श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 291
 
 
श्लोक  2.23.291 
মন্দিরা, মৃদঙ্গ, করতাল, শঙ্খ,
না জানি কতেক বাজে
মহা-হরি-ধ্বনি, চতুর্-দিকে শুনি,
মাঝে শোভে দ্বিজ-রাজে
मन्दिरा, मृदङ्ग, करताल, शङ्ख,
ना जानि कतेक बाजे
महा-हरि-ध्वनि, चतुर्-दिके शुनि,
माझे शोभे द्विज-राजे
 
 
अनुवाद
जो नाद, मृदंग, करतल और शंख बज रहे थे, उनकी गिनती कोई नहीं कर सकता था। श्रेष्ठ ब्राह्मण हरि के नामों के प्रचंड स्पंदन के बीच नाच रहे थे।
 
The sounds of the drums, drums, cymbals, and conch shells were beyond count. The best Brahmins danced to the blaring reverberations of Hari's names.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)