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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 279
श्लोक
2.23.279
নিত্যানন্দ-চাঙ্দ, মাধব-নন্দন,
শোভা করে দুই-পাশে
যত প্রিয-গণ, করযে কীর্তন,
সবাঽ চাহিঽ চাহিঽ হাসে
नित्यानन्द-चाङ्द, माधव-नन्दन,
शोभा करे दुइ-पाशे
यत प्रिय-गण, करये कीर्तन,
सबाऽ चाहिऽ चाहिऽ हासे
अनुवाद
नित्यानन्द चन्द्र और माधवपुत्र भगवान के दोनों ओर थे। जब उनके प्रिय पार्षद कीर्तन कर रहे थे, भगवान उनकी ओर देखकर मुस्कुरा रहे थे।
Nityananda Chandra and Madhavaputra were on either side of the Lord. As His beloved associates sang kirtan, the Lord looked at them and smiled.
तात्पर्य
माधव-नन्दन वाक्यांश श्री गदाधर पंडित को संदर्भित करता है जो माधव मिश्र के पुत्र थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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