श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 274
 
 
श्लोक  2.23.274 
চন্দন-চর্চিত, শ্রী-অঙ্গ শোভিত,
গলে দোলে বনমালাঢুলিযা পডযে, প্রেমে থির নহে,
আনন্দে শচীর বালা
चन्दन-चर्चित, श्री-अङ्ग शोभित,
गले दोले वनमालाढुलिया पडये, प्रेमे थिर नहे,
आनन्दे शचीर बाला
 
 
अनुवाद
उनका दिव्य शरीर चन्दन से लिपटा हुआ था और उनके गले में वन पुष्पों की माला थी। शचीपुत्र आनंद के मारे इधर-उधर लड़खड़ा रहे थे।
 
His divine body was smeared with sandalwood paste, and around his neck was a garland of forest flowers. The son of Sachi was tottering about in ecstasy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)