श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 272
 
 
श्लोक  2.23.272 
অপূর্ব বিকার, নযনে সু-ধার,
হুঙ্কার গর্জন শুনি
হাসিযা হাসিযা, শ্রী-ভুজ তুলিযা,
বলে ঽহরি হরিঽ বাণী
अपूर्व विकार, नयने सु-धार,
हुङ्कार गर्जन शुनि
हासिया हासिया, श्री-भुज तुलिया,
बले ऽहरि हरिऽ वाणी
 
 
अनुवाद
उन्होंने परमानंद प्रेम के अद्भुत लक्षण प्रदर्शित किए। उनकी आँखों से आँसू बह निकले और वे ज़ोर से दहाड़े। उन्होंने हाथ उठाकर और मुस्कुराते हुए हरि का नाम जपते हुए कहा।
 
He displayed amazing signs of ecstatic love. Tears welled up in his eyes, and he roared loudly. He raised his hands and smiled, chanting the name of Hari.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)