श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 260
 
 
श्लोक  2.23.260 
মন্দাকিনী-হেন প্রেম-ধারার গমন
চান্দেরে না লয মন দেখিঽ সে বদন
मन्दाकिनी-हेन प्रेम-धारार गमन
चान्देरे ना लय मन देखिऽ से वदन
 
 
अनुवाद
उनके नेत्रों से प्रेमाश्रु गंगा की धारा के समान बह रहे थे। उनके मुख को देखने वालों का मन अब चन्द्रमा की ओर आकर्षित नहीं हो रहा था।
 
Tears of love flowed from his eyes like the Ganges. Those who gazed upon his face were no longer drawn to the moon.
तात्पर्य
आनंद प्रेम की धारा की तुलना मंदाकिनी से की गई थी, स्वर्गीय ग्रहों में गंगा, और चंद्रमा की सुंदरता श्री गौरासुंदर के चेहरे के सामने नगण्य थी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)