श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.23.26 
প্রভুর সে আজ্ঞা নাহি কেহ যাইবারে
ঽসঙ্গোপে থাকিবাঽ, এই বলিলুঙ্ তোমারে”
प्रभुर से आज्ञा नाहि केह याइबारे
ऽसङ्गोपे थाकिबाऽ, एइ बलिलुङ् तोमारे”
 
 
अनुवाद
“परन्तु मैं तुमसे कहता हूँ, प्रभु ने हमें आदेश दिया है कि किसी को भी अन्दर न लाएँ, इसलिए तुम्हें छिपे रहना होगा।”
 
“But I tell you, the Lord has commanded us not to bring anyone in, so you must stay hidden.”
तात्पर्य
महाप्रभु के निर्देशों के अनुसार, दूध पीने वाले ब्रह्मचारी की श्री भगवान के मंत्र सुनने की योग्यता नहीं थी, यद्यपि वह पाप रहित शरीर वाला था। जब उसने श्रीवास से भगवान के नृत्य को देखने की अनुमति माँगी तो श्रीवास ने उसे घर के भीतर ही छिपे रहने की सलाह दी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)