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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 255
श्लोक
2.23.255
স্ত্রীযে যত জযকার দিযা বলে ঽহরিঽ
তাহা লক্ষ বত্সরে ও বর্ণিতে না পারি
स्त्रीये यत जयकार दिया बले ऽहरिऽ
ताहा लक्ष वत्सरे ओ वर्णिते ना पारि
अनुवाद
मैं एक लाख वर्ष में भी स्त्रियों के मंगलमय स्वरों और हरि नाम के स्पंदनों का वर्णन नहीं कर सकता।
I cannot describe the auspicious voices of women and the vibrations of the name Hari even in a million years.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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