श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 243
 
 
श्लोक  2.23.243 
কীর্তন করেন সবে ঠাকুরের সনে
ঽকোন্ দিগে যাইঽ ইহা কেহ নাহি জানে
कीर्तन करेन सबे ठाकुरेर सने
ऽकोन् दिगे याइऽ इहा केह नाहि जाने
 
 
अनुवाद
जब भक्तगण भगवान के साथ कीर्तन कर रहे थे तो वे भूल गए कि वे किस दिशा में जा रहे हैं।
 
While the devotees were singing kirtan with the Lord, they forgot which direction they were going.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)