श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 227
 
 
श्लोक  2.23.227 
হস্ত যে হৈল চারি, তাহে নাহি জানে
আপনার স্মৃতি গেল, তবে তালি কেনে
हस्त ये हैल चारि, ताहे नाहि जाने
आपनार स्मृति गेल, तबे तालि केने
 
 
अनुवाद
उन्हें ध्यान ही नहीं रहा कि उनकी चार भुजाएँ हैं। वे तो खुद को भी भूल गए, तो फिर ताली कैसे बजाई?
 
He didn't even remember that he had four arms. He even forgot himself, so how did he clap?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)