श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 226
 
 
श्लोक  2.23.226 
জীবমাত্র চতুর্ভুজ হৈল সকল
না জানিল কেহ, কৃষ্ণ-আনন্দে বিহ্বল
जीवमात्र चतुर्भुज हैल सकल
ना जानिल केह, कृष्ण-आनन्दे विह्वल
 
 
अनुवाद
सभी जीवों ने चतुर्भुज धारण कर लिए, फिर भी कृष्ण के प्रेम में विभोर होने के कारण उन्हें इसका पता भी नहीं चला।
 
All the creatures assumed the four arms, yet they did not even realize it because they were engrossed in the love of Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)