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श्लोक 2.23.213  |
কোটি কোটি মহা-তাপ জ্বলিতে লাগিল
চন্দ্রের কিরণ সর্ব শরীরে হৈল |
कोटि कोटि महा-ताप ज्वलिते लागिल
चन्द्रेर किरण सर्व शरीरे हैल |
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| अनुवाद |
| लाखों जलती हुई मशालों से निकलने वाली रोशनी हर किसी के शरीर पर चंद्रमा की किरणों की तरह प्रतिबिंबित हो रही थी। |
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| The light from millions of burning torches was reflecting on everyone's body like moonlight. |
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