श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 194
 
 
श्लोक  2.23.194 
শেষে চোর পাসরিল ভাব আপনার
ঽহরিঽ বৈ মুখে কারো না আইসে আর
शेषे चोर पासरिल भाव आपनार
ऽहरिऽ बै मुखे कारो ना आइसे आर
 
 
अनुवाद
अंततः चोर अपनी योजना भूल गये और उनके मुख से हरि नाम के अतिरिक्त और कुछ भी सुनाई नहीं दिया।
 
Ultimately the thieves forgot their plan and nothing was heard from their mouths except the name Hari.
तात्पर्य
इस संबंध में एक को ‘स्तुत्री-पुत्रादि-कथाम्‌ [स्तुत्री-पुत्रादि-कथां जहुर्‌ विवासयिनः शास्त्र-प्रवादं बुधाः योगीन्द्राविजहुर्‌ मरुन्निबंध-ज-क्लेशं तपस्तापसाः ज्ञानाभ्यास-विधिं जहुः च यतयः चित्तया-चंद्रे परं आविष्कुर्वाति भक्ति-योग-पादवीं नैवा अन्य आसीद रसः , "अब कि प्रभु चैतन्यचंद्र ने शुद्ध भक्ति-भक्ति-मार्ग को प्रकट किया है, भौतिकवादी अपनी पत्नियों, बच्चों और भौतिक मामलों के बारे में बात करना बंद कर दिया है, विद्वानों ने शास्त्रों पर बहस छोड़ दी है, योगियों साँस नियंत्रण हेतु कष्ट करना छोड़ दिया है, तपस्वियों ने तपस्या करना छोड़ दिया है और अवैयक्तिकवादी वेदांत अध्ययन करना छोड़ दिया है। कृष्ण को भक्ति-भक्ति-सेवा की मधुर सुंदरता से आकर्षित होकर, सभी दुकानदारों ने अपनी निरर्थक दुकानों को बंद कर दिया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)