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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 193
श्लोक
2.23.193
চোরের আছিল চিত্ত—ঽএই অবসরে
আজি চুরি করিবাঙ প্রতি-ঘরে ঘরেঽ
चोरेर आछिल चित्त—ऽएइ अवसरे
आजि चुरि करिबाङ प्रति-घरे घरेऽ
अनुवाद
चोरों ने सोचा, "यह सुनहरा मौका है। आज हम हर घर में चोरी करेंगे।"
The thieves thought, "This is a golden opportunity. Today we will steal from every house."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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