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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
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श्लोक 192
श्लोक
2.23.192
বলে স্ত্রী-পুরুষ সব লোক প্রভু-সঙ্গে
কেহ কাহো না জানে পরমানন্দ-রঙ্গে
बले स्त्री-पुरुष सब लोक प्रभु-सङ्गे
केह काहो ना जाने परमानन्द-रङ्गे
अनुवाद
भगवान के साथ भजन करने वाले पुरुष और महिलाएं अपने परमानंद में यह नहीं जानते थे कि वहां और कौन-कौन मौजूद है।
The men and women who sang hymns with the Lord were in their ecstasy unaware of who else was present there.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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