श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.23.190 
ঘৃতের প্রদীপ জ্বলে পরম সুন্দর
দধি, দূর্বা, ধান্য দিব্য বাটার উপর
घृतेर प्रदीप ज्वले परम सुन्दर
दधि, दूर्वा, धान्य दिव्य बाटार उपर
 
 
अनुवाद
वहाँ अत्यंत आकर्षक घी के दीपक जल रहे थे और दही, दूर्वा और चावल से भरी भव्य थालियाँ रखी हुई थीं।
 
There were very attractive ghee lamps burning and grand plates filled with curd, durva and rice were kept.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)