श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  2.23.181 
সুরঙ্গ অধর অতি, সুন্দর দশন
শ্রুতি-মূলে শোভা করে ভ্রূ-যুগ-পত্তন
सुरङ्ग अधर अति, सुन्दर दशन
श्रुति-मूले शोभा करे भ्रू-युग-पत्तन
 
 
अनुवाद
उसके होंठ मनमोहक थे, दाँत सुन्दर थे, और उसकी भौहें कानों के नीचे तक फैली हुई थीं।
 
Her lips were captivating, her teeth were beautiful, and her eyebrows extended down to her ears.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)