सर्व-काल पयः-पान, अन्न नाहि खाय
प्रभुर कीर्तन विप्र देखिबारे चाय
अनुवाद
वह केवल दूध पीता था, चावल नहीं खाता था। यह ब्राह्मण भगवान का कीर्तन देखना चाहता था।
He drank only milk and did not eat rice. This Brahmin wanted to see the Lord's kirtan.
तात्पर्य
चूँकि वह ब्रह्मचारी जो विचार करता था कि पका हुआ भोजन जीवन को नष्ट करता है और जिसने दूध और आम जैसे कच्चे खाद्य पदार्थों पर ही जीवनयापन करने की प्रतिज्ञा की थी, वह परमेश्वर की महिमा सुनने के लिए अयोग्य था, उसके पास बंद दरवाजों के पीछे कीर्तन सुनने की कोई योग्यता नहीं थी। परमेश्वर के प्रति प्रत्यक्ष सेवा शुष्क त्याग के सिद्धांतों के भीतर कभी नहीं पाई जाती। जो मूर्ख लोग त्याग का दुरुपयोग करते हैं वे मानते हैं कि प्रभु की उपासना की सामग्री को अस्वीकार करने के योग्य हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥