श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 179
 
 
श्लोक  2.23.179 
আজানু-লম্বিত মালা সর্ব-অঙ্গে দোলে
সর্ব-অঙ্গ তিতে পদ্ম-নযনের জলে
आजानु-लम्बित माला सर्व-अङ्गे दोले
सर्व-अङ्ग तिते पद्म-नयनेर जले
 
 
अनुवाद
उनकी पुष्पमाला, जो घुटनों तक लटक रही थी, इधर-उधर झूलने लगी। उनके कमल-नेत्रों से बहते आँसुओं से उनका सारा शरीर भीग गया।
 
His garland, which hung down to his knees, began to sway. His whole body was drenched with tears flowing from his lotus eyes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)