श्री चैतन्यदेव के असंख्य सेवक हैं। ये सेवक सभी अवतारों के स्रोत के विविध अवतारों के लीलाओं में सहायता करते हैं। वेदव्यास ने पुराणों को संकलित करने के समय उनका वर्णन किया है और करेंगे। छंद कृष्ण वर्णं त्विषाकृष्णं [कृष्ण वर्णं त्विषाकृष्णं, सांगोपांगास्त्र पार्षदम्, यज्ञैः संकीर्तन प्रायैः, यजन्ति हि सु मेधसः, “कलियुग में, बुद्धिमान लोग कीर्तन करके उस भगवान् के अवतार की पूजा करते हैं जो सतत कृष्ण के नाम का गान करते हैं। यद्यपि उनका रंग सांवला नहीं है, फिर भी वह स्वयं कृष्ण हैं। उनके साथ उनके सहयोगी, सेवक, अस्त्र और गुप्त साथी हैं।” (भाग. 11.5.32)] श्रीमद् भागवतम में पाया जाता है। लेखक यह कहकर अपनी विनम्रता प्रदर्शित करता है, “वेदव्यास की तरह इन विषयों की व्याख्या करने की क्षमता मुझ जैसे व्यक्ति में नहीं है।” श्री शचिनंदन के अवतार में जो अद्भुत लीलाएं प्रकट हुई हैं, वे उनके किसी अन्य अवतार में प्रकट नहीं हुई हैं। वेदव्यास द्वारा वर्णित न किए गए विभिन्न अवतारों के लीलाओं के वर्णन के साथ-साथ भगवान के उदार लीलाओं की प्रमुखता सभी अवतारों के सबसे दयालु स्रोत के लीलाओं में प्रकट हुई है।
