श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 145
 
 
श्लोक  2.23.145 
ধরিযা বুলিব প্রভু এই কার্য মোর
তিলেকো হৃদযে পদ না ছাডিব তোর
धरिया बुलिब प्रभु एइ कार्य मोर
तिलेको हृदये पद ना छाडिब तोर
 
 
अनुवाद
"हे प्रभु, मेरा एकमात्र कर्तव्य आपके सहारे का अनुसरण करना होगा। मैं एक क्षण के लिए भी आपके चरणों को अपने हृदय से नहीं हटाऊँगा।
 
“O Lord, my only duty will be to follow You. I will not remove Your feet from my heart even for a moment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)