श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.23.133 
বাপে বান্ধিলে ও পুত্র বান্ধে আপনার
কেহ কারে হরিষে না পারে রাখিবার
बापे बान्धिले ओ पुत्र बान्धे आपनार
केह कारे हरिषे ना पारे राखिबार
 
 
अनुवाद
पिता ने मशाल तैयार की तो बेटे ने भी तैयार की। अपने उल्लास में कोई किसी को रोक नहीं सकता था।
 
The father prepared the torch, and the son did the same. In their joy, no one could restrain the other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)