श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 132
 
 
श्लोक  2.23.132 
হেন জন নাচিবেন নগরে নগরে
আনন্দে দেউটি বাঙ্ধে প্রতি-ঘরে ঘরে
हेन जन नाचिबेन नगरे नगरे
आनन्दे देउटि बाङ्धे प्रति-घरे घरे
 
 
अनुवाद
अब जब वे नवद्वीप की सड़कों पर नृत्य करने वाले थे, तो प्रत्येक घर के लोगों ने खुशी-खुशी अपनी मशालें तैयार कर लीं।
 
Now that they were about to dance on the streets of Navadvipa, the people of every house happily prepared their torches.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)