vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण
»
श्लोक 127
श्लोक
2.23.127
অনন্ত ব্রহ্মাণ্ড মোর সেবকের দাস
মুঞি বিদ্যমানে ও কি ভযের প্রকাশ
अनन्त ब्रह्माण्ड मोर सेवकेर दास
मुञि विद्यमाने ओ कि भयेर प्रकाश
अनुवाद
"असंख्य ब्रह्माण्ड मेरे सेवकों के सेवक हैं। जब मैं स्वयं उपस्थित हूँ तो कौन सा भय प्रकट हो सकता है?
"The countless universes are servants of My servants. What fear can arise when I Myself am present?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×