श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.23.113 
নগরে নগরে যে বুলেন নিত্যানন্দ
দেখ তার কোন্ দিন বাহিরায রঙ্গ
नगरे नगरे ये बुलेन नित्यानन्द
देख तार कोन् दिन बाहिराय रङ्ग
 
 
अनुवाद
“नित्यानंद, जो शहर में स्वतंत्र रूप से विचरण करता है, का सुख शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा।
 
“The happiness of Nityananda, who moves freely in the city, will soon end.
तात्पर्य
“एक दिन जब उन्हें समुचित दंड मिलेगा तो नगर-कीर्तन में श्री नित्यानंद का मजा उठाना खत्म हो जाएगा।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)