श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 110
 
 
श्लोक  2.23.110 
কেহ বলে,—“হরি-নাম লৈব মনে মনে
হুডাহুডি বলিযাছে কোন্ বা পুরাণে
केह बले,—“हरि-नाम लैब मने मने
हुडाहुडि बलियाछे कोन् वा पुराणे
 
 
अनुवाद
किसी ने कहा, "मन में हरि का नाम जपना चाहिए। कौन-सा पुराण ज़ोर-ज़ोर से जप करने की सलाह देता है?"
 
Someone said, "One should chant Hari's name in the mind. Which Purana advises chanting loudly?"
तात्पर्य
सर्वोच्च प्रभु के विषयों के प्रचार को रोकने के लिए नास्तिक तथाकथित हिंदुओं ने काजी का पक्ष लिया और हर्नाम का नाम जपने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए एकाकी पूजा और अवैयक्तिकता के दर्शन के शाब्दिक वर्णनों का लाभ उठाया। मन। उन्होंने मूर्खतापूर्ण तर्क पेश किए जैसे: "कोई भी शास्त्र हरि-नाम के ज़ोरदार जप या नृत्य और वाद्ययंत्रों के साथ हरि-नाम-संकीर्तन के प्रदर्शन की अनुशंसा नहीं करता है।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)