श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 23: काजी को उद्धार करने वाले दिन नवद्वीप में भगवान का भ्रमण  »  श्लोक 109
 
 
श्लोक  2.23.109 
দুঃখে সব নগরিযা থাকে লুকাইযা
হিন্দু-গণে কাজী সব মারে কদর্থিযা
दुःखे सब नगरिया थाके लुकाइया
हिन्दु-गणे काजी सब मारे कदर्थिया
 
 
अनुवाद
संकट की स्थिति में नगरवासी छिपे रहे, जबकि काजी हिंदुओं को पीटते और दंडित करते रहे।
 
In the face of crisis, the townspeople hid while the Qazi continued to beat and punish the Hindus.
तात्पर्य
काज़ी के दमन के कारण नवद्वीप के निवासियों को कीर्तन में वाद्य यंत्र बजाने पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन उन्होंने गुप्त रूप से ऐसा करना जारी रखा। भक्तों से ईर्ष्या रखने वाले पापी नगरवासियों की मदद से, काज़ी ने कीर्तन में लिप्त लोगों की तलाश में इधर-उधर भटकना शुरू कर दिया। जब भी वह उन्हें पाता, वह उनका अपमान करता और उन्हें पीटता।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)