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श्लोक 2.23.108  |
এই মত প্রতি-দিন দুষ্ট-গণ লৈযানগর
ভ্রমযে কাজী কীর্তন চাহিযা |
एइ मत प्रति-दिन दुष्ट-गण लैयानगर
भ्रमये काजी कीर्तन चाहिया |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार काजी और उसके पापी अनुयायी प्रतिदिन कीर्तन की तलाश में शहर में घूमते रहते थे। |
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| Thus the Qazi and his sinful followers roamed the city every day in search of kirtan. |
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