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श्लोक 2.22.98  |
মোহিত হৈযা চাহে অদ্বৈত আচার্য
সেই মুখ চাহে সব পরিহরিঽ কার্য |
मोहित हैया चाहे अद्वैत आचार्य
सेइ मुख चाहे सब परिहरिऽ कार्य |
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| अनुवाद |
| अद्वैत आचार्य भगवान के मुख को देखते ही सब कुछ भूल गए और आश्चर्यचकित हो गए। |
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| Advaita Acharya forgot everything and was astonished as soon as he saw the face of God. |
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