श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  2.22.94 
মাযের আদেশে প্রভু ধায বিশ্বম্ভর
সত্বরে আইলাযথা অদ্বৈতের ঘর
मायेर आदेशे प्रभु धाय विश्वम्भर
सत्वरे आइलायथा अद्वैतेर घर
 
 
अनुवाद
अपनी माता के आदेश पर विश्वम्भर शीघ्रता से अद्वैत के घर की ओर दौड़े।
 
On his mother's orders, Vishvambhar quickly ran towards Advaita's house.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)