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श्लोक 2.22.91  |
নিরবধি থাকে প্রভু অদ্বৈতের সঙ্গে
বিশ্বরূপ-সহিত অদ্বৈত রস-রঙ্গে |
निरवधि थाके प्रभु अद्वैतेर सङ्गे
विश्वरूप-सहित अद्वैत रस-रङ्गे |
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| अनुवाद |
| विश्वरूप निरन्तर अद्वैत की संगति में रहते थे और वे दोनों परमानंद प्रेम के रस का आनन्द लेते थे। |
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| Vishwaroopa was constantly in the company of Advaita and they both enjoyed the nectar of ecstatic love. |
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