श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  2.22.86 
যদি বা পডায কেহ ভাগবত-গীতা
সেহ না বাখানে ভক্তি, করে শুষ্ক-চিন্তা
यदि वा पडाय केह भागवत-गीता
सेह ना वाखाने भक्ति, करे शुष्क-चिन्ता
 
 
अनुवाद
यद्यपि कुछ लोग श्रीमद्भागवतम् या भगवद्गीता पढ़ाते थे, परन्तु वे भक्ति सेवा का उल्लेख नहीं करते थे, बल्कि केवल शुष्क अटकलों में लगे रहते थे।
 
Although some people taught Srimad Bhagavatam or Bhagavad Gita, they did not mention devotional service, but engaged only in dry speculations.
तात्पर्य
अपने शिष्यों को भगवद-गीता और श्रीमद भागवतम जैसे वैष्णव साहित्य पढ़ाने के बावजूद, शिक्षक बाहरी विचार करके निरर्थक तर्क और शुष्क अनुमान में लिप्त थे, बजाय इसके कि अपने लाभ के बारे में सोचें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)