श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.22.81 
ঽপরম সুবুদ্ধিঽ করিঽ সবে বাখানিল
বিষ্ণু-মাযা-মোহে কেহ তত্ত্ব না জানিল
ऽपरम सुबुद्धिऽ करिऽ सबे वाखानिल
विष्णु-माया-मोहे केह तत्त्व ना जानिल
 
 
अनुवाद
उन्होंने सब कुछ अत्यंत बौद्धिक ढंग से समझाया, किन्तु विष्णु की माया के प्रभाव से कोई भी यह नहीं समझ सका कि उन्होंने क्या कहा।
 
He explained everything in a very intellectual manner, but due to the influence of Vishnu's Maya, no one could understand what he said.
तात्पर्य
विश्वरूप प्रत्यक्षरूप से स्वयं परमेश्वर श्रीकृष्ण ही हैं। इस कारण से विष्णु की माया से मोहित होकर विद्वान लोग परमतत्त्व के विज्ञान को कुछ भी नहीं समझ पाए। चूँकि आत्मा की सनातन निष्ठा यानी भक्ति-भाव उनमें नहीं जगा था इसलिए वे उन व्याख्यानों को समझने के ही अधिकारी नहीं थे। इस बात पर संकर्षण प्रभु को कोई आश्चर्य न हुआ।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)