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श्लोक 2.22.8  |
বৈষ্ণবের ঠাঙি যার হয অপরাধ
কৃষ্ণ-কৃপা হৈলে ও তার প্রেম-বাধ |
वैष्णवेर ठाङि यार हय अपराध
कृष्ण-कृपा हैले ओ तार प्रेम-वाध |
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| अनुवाद |
| यदि कोई कृष्ण की कृपा प्राप्त करने के बाद भी किसी वैष्णव के प्रति अपराध करता है, तो उसकी भगवद्प्रेम प्राप्ति रुक जाती है। |
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| If someone commits an offense against a Vaishnava even after receiving Krishna's grace, his attainment of God's love is stopped. |
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