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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन
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श्लोक 64
श्लोक
2.22.64
এক-দিন সভায চলিলা মিশ্রবর
পাছে বিশ্বরূপ পুত্র পরম সুন্দর
एक-दिन सभाय चलिला मिश्रवर
पाछे विश्वरूप पुत्र परम सुन्दर
अनुवाद
एक दिन जगन्नाथ मिश्र विद्वानों की एक सभा में गए। उनके पीछे-पीछे उनके सुंदर पुत्र विश्वरूप भी गए।
One day Jagannatha Mishra went to a gathering of scholars. His handsome son, Visvarupa, followed him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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