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श्लोक 2.22.64  |
এক-দিন সভায চলিলা মিশ্রবর
পাছে বিশ্বরূপ পুত্র পরম সুন্দর |
एक-दिन सभाय चलिला मिश्रवर
पाछे विश्वरूप पुत्र परम सुन्दर |
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| अनुवाद |
| एक दिन जगन्नाथ मिश्र विद्वानों की एक सभा में गए। उनके पीछे-पीछे उनके सुंदर पुत्र विश्वरूप भी गए। |
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| One day Jagannatha Mishra went to a gathering of scholars. His handsome son, Visvarupa, followed him. |
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