श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  2.22.62 
সর্ব-শাস্ত্রে বিশারদ পরম সুধীর
নিত্যানন্দ-স্বরূপের অভেদ শরীর
सर्व-शास्त्रे विशारद परम सुधीर
नित्यानन्द-स्वरूपेर अभेद शरीर
 
 
अनुवाद
वे सभी शास्त्रों के ज्ञाता और परम संयमी थे। वे नित्यानंद स्वरूप से अभिन्न थे।
 
He was a scholar of all scriptures and a supreme ascetic. He was one with the eternal blissful form.
तात्पर्य
विश्वरूप, प्रभु के बड़े भाई, सभी शास्त्रों में निपुण थे। वह श्री नित्यानंद स्वरूप से अविभिन्न थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)