श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  2.22.42 
প্রাকৃত-শব্দে ও যেবা বলিবেক ঽআইঽ
ঽআইঽ শব্দ-প্রভাবে তাহার দুঃখ নাই
प्राकृत-शब्दे ओ येबा बलिबेक ऽआइऽ
ऽआइऽ शब्द-प्रभावे ताहार दुःख नाइ
 
 
अनुवाद
“यदि कोई व्यक्ति 'ऐ' शब्द को सांसारिक शब्द के रूप में भी बोले, तो भी 'ऐ' शब्द के प्रभाव से वह सभी दुखों से मुक्त हो जाएगा।
 
“Even if a person utters the word 'Ai' as a worldly word, he will be freed from all sufferings by the effect of the word 'Ai'.
तात्पर्य
भौतिक दृष्टिकोण से भी यदि कोई आइ शब्द का उच्चारण करे, जैसा कि श्री गौर के माँ कही जाने वाली श्री सचीदेवी को सम्बोधित किया था, तो इस शब्द को बोलने मात्र से जीव को त्रिविध भौतिक कष्टों से मुक्त किया जा सकता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)