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श्लोक 2.22.36  |
অদ্বৈত-চরণ-ধূলি লৈলে মাথায
হৈবেক প্রেম-ভক্তি আমার আজ্ঞায” |
अद्वैत-चरण-धूलि लैले माथाय
हैबेक प्रेम-भक्ति आमार आज्ञाय” |
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| अनुवाद |
| "यदि वह अद्वैत के चरणों की धूल अपने सिर पर धारण करेगी, तो मेरी आज्ञा से उसे भगवान का परम प्रेम प्राप्त होगा।" |
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| "If she wears the dust of the feet of Advaita on her head, then by my command she will attain the supreme love of God." |
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