श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.22.31 
যদি বা বৈষ্ণব-স্থানে থাকে অপরাধ
তথাপিহ খণ্ডাইযা করহ প্রশাদ”
यदि वा वैष्णव-स्थाने थाके अपराध
तथापिह खण्डाइया करह प्रशाद”
 
 
अनुवाद
“भले ही उसने किसी वैष्णव के विरुद्ध कोई अपराध किया हो, तो भी दयालु बनो और उसे नष्ट कर दो।”
 
“Even if he has committed a crime against a Vaishnava, be merciful and destroy him.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)