श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.22.141 
নিত্যানন্দ বিশ্বরূপ—অভেদ শরীর
আই ইহা জানে, জানে আর কোন ধীর
नित्यानन्द विश्वरूप—अभेद शरीर
आइ इहा जाने, जाने आर कोन धीर
 
 
अनुवाद
नित्यानन्द और विश्वरूप में कोई भेद नहीं है। माता शची तथा कुछ अन्य विवेकशील व्यक्ति इस तथ्य को जानते हैं।
 
There is no difference between Nityananda and the Universal Form. Mother Shachi and some other discerning individuals know this fact.
तात्पर्य
श्री नित्यानंद प्रभु और विश्वरूप वास्तव में पृथक नहीं हैं। श्री शचीदेवी इस बात को अच्छी तरह से जानती थीं। यह सोचना कि चूंकि अद्वैत के मार्गदर्शन में विश्वरूप को आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त हुई थी, इसलिए श्री नित्यानंद प्रभु भी अद्वैत के अधीन थे, अत्यंत अनुचित है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)