श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  2.22.140 
যে জন শুনযে বিশ্বরূপের আখ্যান
সে হয অনন্ত-দাস নিত্যানন্দ-প্রাণ
ये जन शुनये विश्वरूपेर आख्यान
से हय अनन्त-दास नित्यानन्द-प्राण
 
 
अनुवाद
जो कोई विश्वरूप के विषय में सुनता है, वह भगवान अनंत का सेवक बन जाता है। नित्यानंद ही उसका जीवन और आत्मा बन जाते हैं।
 
Whoever hears about the Universal Form becomes a servant of Lord Ananta. Nityananda becomes his life and soul.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)