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श्लोक 2.22.135  |
নিত্যানন্দ-প্রসাদে সে গৌরচন্দ্র জানি
নিত্যানন্দ-প্রসাদে সে বৈষ্ণবেরে চিনি |
नित्यानन्द-प्रसादे से गौरचन्द्र जानि
नित्यानन्द-प्रसादे से वैष्णवेरे चिनि |
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| अनुवाद |
| नित्यानंद की कृपा से ही मनुष्य गौरचंद्र को जान सकता है और नित्यानंद की कृपा से ही मनुष्य वैष्णव को पहचान सकता है। |
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| Only by the grace of Nityananda can a man know Gaurachandra and only by the grace of Nityananda can a man recognize a Vaishnava. |
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