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श्लोक 2.22.128  |
বৈষ্ণবের নিন্দা করিবেক যার গণ
তার রক্ষা-সামর্থ্য নাহিক কোন জন |
वैष्णवेर निन्दा करिबेक यार गण
तार रक्षा-सामर्थ्य नाहिक कोन जन |
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| अनुवाद |
| एक वैष्णव अपने किसी भी अनुयायी की रक्षा करने में असमर्थ है जो वैष्णवों की निन्दा करता है। |
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| A Vaishnava is unable to protect any of his followers who slander Vaishnavas. |
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