श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.22.111 
দৈবে কত-দিনে প্রভু করিলা প্রকাশ
নিরবধি অদ্বৈতের সṁহতি বিলাস
दैवे कत-दिने प्रभु करिला प्रकाश
निरवधि अद्वैतेर सꣳहति विलास
 
 
अनुवाद
समय आने पर भगवान ने स्वयं को प्रकट किया, और उसके बाद उन्होंने निरंतर अद्वैत भाव से लीलाओं का आनंद लिया।
 
In due course the Lord revealed Himself, and thereafter He continuously enjoyed the pastimes in non-dual state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)