श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 22: श्री शचीदेवी की अपराध से मुक्ति और नित्यानंद के गुणों का वर्णन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  2.22.108 
মনে মনে গণে, আই হৈযা সুস্থির
“অদ্বৈত সে মোর পুত্র করিল বাহির”
मने मने गणे, आइ हैया सुस्थिर
“अद्वैत से मोर पुत्र करिल बाहिर”
 
 
अनुवाद
जब माता शची शांत हुईं, तो उन्होंने सोचा, “अद्वैत ने मेरे बेटे को घर छोड़ने के लिए प्रेरित किया।”
 
When Mother Shachi calmed down, she thought, “Advaita inspired my son to leave home.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)